5 दिस॰ 2015

असहनशीलता और हम भारतीय


असहनशीलता और हम भारतीय

             विश्व में भारत की पहचान एक ऐसे देश के रूप में की जाती है, जहाँ सदियों से  जातियों, धर्मों, पंथों, भाषाओं, रहन-सहन, खान-पान की विविधता वाले लोगों का  साथ-साथ बसेरा है और वे आपस में प्रेमपूर्वक व्यवहार करते हुए, एक ऐसी संस्कृति का निर्माण करते हैं, जो सभी को साथ ले कर चलने का दर्शन जन्म से ही भारतीयों में विकसित करती हैं, और जिसे हम भारतीय संस्कृति के नाम से जानते हैं। इस संस्कृति को मिटाने का प्रयत्न अनेक बार किया गया, कुछ समय के लिए ऐसी लहरों ने भारतीय संस्कृति में ज्वार-भाटा भी पैदा किया परंतु जल्दी सागर की लहरों की भाँति वे सारे प्रयत्न सागर के गर्भ में समा भी गए। वर्तमान में भी ऐसे ही कुछ प्रयत्न हो रहे हैं, लेकिन इन प्रयत्नों को भारतीय कभी सफल नहीं होने देंगे, यह भी निश्चित है।
           जब भारत महासत्ता बनने की ओर अग्रेसर है, सारी दुनिया में भारत की छवि एक मजबूत देश के रूप में स्थापित हो रही है, तो निश्चित ही कुछ लोगों में आखों में किरकिरी भी पड़ती जा रही है। तब यह भी निश्चित है कि भविष्य में ऐसे अनेक प्रयास किये जाएंगे जिसमें भारत की अखंडता को खंड-खंड किया जा सके। जैसा की आयएसआयएस ने भारत को अनेक टुकड़ों में बाँटने की बात कही। ऐसे सपने अनेक लोगों और देशों ने देखे हैं और देख रहे हैं। अब हम भारतीय लोगों की जिम्मेदारी है कि ऐसे सपने देखनेवाले को मुँह के बल गिराया जाए और अपने देश की अखंडता को सुरक्षित रखे। साथ ही हमारी ये भी बड़ी जिम्मेदारी है कि मीडिया या सोशल मीडिया के माध्यम से  भ्रामक बातों का प्रचार और प्रसार करनेवालों को सच्चाई का आईना दिखाकर चुप रहने के लिए मजबूर किया जाएं।

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